• anshuman_mishra 7w

    बेड़ियां-कर - हाथों में बेड़ियां व्योम - आकाश
    चपला - बिजली झंझावात - तूफान

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    आज मत कहना कि अंधियारा घना है..

    बेड़ियां -कर , रक्त - भीगे केश लेकर,
    अधर सूखे, अर्धमृत - सा वेश लेकर,
    यदि तनिक भी आत्मगौरव शेष हो तो,
    उठ चलो अभिमान के अवशेष लेकर!
    जो उठा है, वो मिटा है, या बना है,
    आज मत कहना कि अंधियारा घना है..

    तीव्र चपला वार से है व्योम मरता,
    शीत झंझावात से कण-कण ठिठुरता,
    अश्रुओं की धार को तब अस्त्र कर लो,
    काट दो हर बंध जो है कैद करता,
    अब कदम पीछे हटा लेना मना है,
    आज मत कहना कि अंधियारा घना है..

    _अंशुमान___