• ink_of_wabi_sabi 79w

    तेरी हर बात मोह्हबत में गवारा करके
    ठिकाने का पता नही पर दिल के बाजार में बैठे हैं गुज़ारा करके
    मायूस होना वाज़िब है मेरा पर मजबूरी नही
    लोग अब लेते हैं मज़ा ज़िक्र तुम्हारा करके

    की इश्क़ खुद मरता नही उसके कातिल राज़ बन जाते हैं
    खुद्दारी को मिटाने खातिर खुद मिट जाते हैं वफादारी में जान देकर के
    बेमिसाल है वो उन्हें किस बात का डर है
    नासमझ ढूंढते हैं सहारा हमे बेसहारा करके

    वो बेवफा है तो गलत है उसे बेवफा कहना
    भूल तो हमने भी किए थे जो गुल खिलाये थे..
    आज काँटों भरा मुक़द्दर खुद ही सजाया है
    चल देता हूँ उनपर मोम समझकर मन में इन्तेक़ाम का मंजर बना करके

    @tathagatthakur