• abr_e_shayari 12w

    इसी खौफ में ज़िदगी दरबदर हो रही है,
    हमारी ही बातें क्यों मुख्तसर हो रही ,
    हमें तुमसे मोहब्बत ही थी याद करो,
    तुम्हीं कहते थे ये, आशना बदतर हो रही है!
    -शायरा