• mamtapoet 99w

    बचपन के वो दोस्त

    बचपन को सोचू तो कुछ दोस्त बहुत याद आते हैं,
    कुछ है खुशियों के खजाने तो कुछ आंखे नाम कर जाते है,
    रिश्तों को निभाने की चिंता न थी,
    न परवाह दुनियादारी की थी,
    दोस्ती में थे सभी रिशतें और स्कूल ही पूरी दुनिया थी,

    दोस्त यदि नाराज हुआ तो गुमसुम मेरा जहा हो जाता था,
    उसे मनाने कभी अध्यापक तो कभी पूरा परिवार खड़ा हो जाता था,
    छोटी छोटी बातों में नाराजगी,और हर लम्हे में चेहरे पर हंसी थी,

    किसी की मुस्कान गजब थी ,किसी की आवाज में खनक थी,
    किसी में लीडरशिप की कशिश थी,
    किसी की हर बात में कसम थी,
    किसी के टिफिन की महक जोरदार थी,

    चित्रकला में माहिर कोई तो कोई अभिनय,नृत्य में था निपुर्ण,
    सब मे अपनी अपनी ख़ूबी, हर एक था किसी न किसी में प्रवीण,
    जब भी किसी प्रसिद्ध व्यक्ति को देखते वहीं बनने के ख्वाब हम देखते,
    स्लेट ,पेंसिल ,ब्लैकबोर्ड के सिवाय श्वेत श्याम न कुछ भी,
    सपनें थे रंगीन और वो दुनिया थी बड़ी हसीन,

    ©mamtapoet