• shadabmalik 17w

    zindagi m kuch haseen pal banke a gye

    जिन्दगी के कुछ हसीन पल बनके आ गये ,
    वो होठो पर मेरे गजल बनके आ गये ।।
    मै तो खण्हर हो गया था जमाने के लिये ,
    वो वाहो मै मेरी ताजमहल बनके आ गये ।।

    कट रहा था सफर मेरा धूप मै चलते चलते,
    वो रहो मै मेरी भीगे बादल बनके आ गये ।।

    भूल चुका था मै शायद इश्क के अहसासो को,
    वो दहलीज पर मेरी बीता कल बनके आ गये ।।

    टूटे छत से बरस रही थी वूँदे तन्हायी की ,
    वो सर्द रातो मै मेरी महल बनके आ गये ।।

    मै भटक रहा था प्यासा रेगिस्तान मै अकेला,
    वो हाथो मै मेरे मीठा जल बनके आ गये ।।

    कई सबाल उठ खडे थे उनके जाने के बाद,
    वो उन सारे सबालो का हल बनके आ गये ।।

    एक तस्बीर मैने बनायी थी अपने हमसफर की,
    वो हूँवहू उस तस्बीर की नकल बनके आ गये