• rajkssora 41w

    हम तुम्हारे है

    है सर्वज्ञ बिखरी यादें तुम्हारी
    गूंजती है हर पल बातें तुम्हारी
    मैं तुम्ही को सोचता हूँ हर पल
    मेरे आज में हो तुम्ही हो मेरे कल

    अनर्गल व्यथाओं से एकदम परे
    नींव संजोने में हम जरा भी ना डरे
    मिथ्या से परे होगा हर पल हमारा
    बहुत ही सुखद होगा आने वाला कल हमारा

    भौतिक सुखों में उतने लिप्त कहाँ है
    किस्सा हमारा इतना संक्षिप्त कहाँ है
    हमने सच को पूर्णतया स्वीकार कर
    प्रेम भाव को खुद में संचार कर
    हमने दोष अपने खुद ही स्वीकारे है
    फिर कहा-प्रिय आज से हम तुम्हारे है
    ©rajkssora