• _myogenic_heart_ 53w

    वो बेटी से बहू हो गई!

    बनके वो लक्ष्मी स्वरूपा इस घर में आई थी..
    सबके लिए नहीं बस पापा के लिए स्वाभिमान आई थी..
    भाईयों की गुड़िया और बहनों को लाडली बन कर आई थी।।

    छोटे छोटे कदमों से चलना सिखलाया था..
    नन्हें से होठों से बोलना मां- पापा बतलाया था..
    मेरी हर ख्वाइश- ज़िद्द को हुक्म की तरह माना गया था।।

    दुनियां से मिली मगर किताबों में डूबी चली गई थी..
    किताबों को बनाकर दोस्त वो उनमें घुल मिल सी गई थी..
    स्कूली शिक्षा पूरी कर कॉलेज जाने कि तैयारी कर में लगी थी।।

    घर आई तो देखा मुबारक बातें चल रही थी..
    पूछा तो पता चला मेरे ब्याह की खुशियां छाई थी..
    बचपन की देहलीज़ पार कर गई, शायद वो समझ गई थी।।

    अपनों की ख़ुशी खातिर ख़ुद को दफ़न कर आई थी..
    बेटी बन पूरे घर में नाचने वाली, अब किसी की बहू बन गई थी..
    दुप्पटा भी जिसको भारी लगता, अब खुद पर्दे में रखने लगी गई थी..
    तवे की पहली रोटी खाने की ज़िद्द करने वाली, अब सबको खिला कर खाना सीख गई थी।।

    ~मनीषा
    @_myogenic_heart_

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    बेटी से बहू बन गई..

    वो बच्ची बनी फिरती है, अब ख़ुद बच्चों को संभाल रही है..
    हांजी वो अब समझदार से सारे काम निपटाने लगी है..
    अरे हा अब वो नादानियां भूल श्यानी होने लगी है..
    अब वो बहू होने के सारे फर्ज़ निभाने में लगी है..

    ©_myogenic_heart_