• ravibhushanbhardwaj 9w

    ये आँखे तुम्हारी ये होंठ तुम्हारे,
    छू लूं जो इन्हें घबरा ना जाना,
    ये मौसम है इश्क़ का जो कर दूँ शरारत,
    मुझे माफ़ करना माफ़ करना !
    ©रवि भूषण भारद्वाज 'इंद्रा'