• _relatable_asa_ 70w

    महफिल सजी है आज, अलग से जिने के लिए,
    हवा भी कुछ अलग से बह रही आज, सांसों में सांस भरने के लिए,
    जिंदगी बीच में कुछ पहलू भी छोड रही थी खूद से,
    शायद इसीलिए आज कुछ दबे लफ्ज आ खडे हुए जुबान पर बाहर आने के लिए ।

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