• krati_sangeet_mandloi 38w

    रूठा सा इश्क़

    ना जाने रूठा-रूठा सा इश्क़, मुझे सताता क्यों है,
    मेरा झूठा-झूठा सा ऐतबार, इस पर आता क्यों है।

    क़ुर्बत में इसकी, मैं जितना करीब आना चाहती हूँ,
    उतना ही दूरियों का सिलसिला, ये बनाता क्यों है।

    दर्द-ग़म देता है, फ़िर दवा भी मयस्सर करता है,
    कैसा है ये, अलहदा रिश्ता मुझसे निभाता क्यों है।

    मैं वफ़ा लेकर चलती हूँ, इसकी वीरान गलियों में,
    तब बेवफ़ाई का मंज़र, ये मुझे दिखाता क्यों है।

    इश्क़ में, इश्क़ के ख़ातिर, होना चाहती हूँ फ़ना,
    लेकिन बेग़रज सा इश्क़, मेरे हिस्से आता क्यों है।

    जिसे पाया भी नहीं, जुदा भी जो मुझसे नहीं हुआ,
    मेरा इश्क़, मुक़र्रर इश्क़ के आँसू बहाता क्यों है।

    ©Krati_Sangeet_Mandloi
    (21-04-2021)✍️ (26-04-2021)