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    दफनाने पडते हैं उसूलोंके बोझों तले कुछ ख्वाब,
    अहमियत मनसे कुछ ठीक नही लगती जो गिन रहे हैं आज कर्मों से,
    कुछ पराए समझ जाते हैं अपना मान कर, यहाँ तो अपने ही पराएपन का मतलब समझा जाते हैं।

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