• krati_sangeet_mandloi 34w

    मरने के बाद

    जीवन है चार दिन का, एक दिन सबको जाना है,
    इच्छाएं है सौ साल की, कल का नहीं ठिकाना है।

    मोह, माया में उलझा मन, सत्य से दूर जा रहा,
    कुछ भी स्थिर नहीं, अस्थिरता को गले लगा रहा।

    कुछ भी तेरा नहीं यहाँ, फ़िर किस बात का गुमान है,
    मरने के बाद शरीर भी नहीं, जिसमें अटकी जान है।

    शरीर तेरा भी खाक़ होगा, मेरा भी खाक़ होगा,
    कुछ भी ना बचेगा, सब कुछ जलकर राख होगा।

    क्षणभंगुर अस्तित्व तेरा, शारीरिक सुख अनित्य है,
    आत्मा ही है अजेय-अमर, वही हर क्षण नित्य है।

    छल-कपट, द्वेष करेगा, बुराई में जीवन बिताएगा,
    मरने के बाद फ़िर ऊपर, कौन सा मुँह दिखाएगा।

    जन्म-मरण के फेर में, हर प्राणी संघर्ष से पिसता है,
    मानव जन्म अनमोल है, चौरासी योनि में मिलता है।

    महत्व समझ, अपने द्वारा तू अपना उद्धार कर ले,
    ईश भक्ति में लीन होकर, भवसागर को पार कर ले।

    ©Krati_Sangeet_Mandloi
    (2-05-2021)✍️ (25-05-2021)