• lafze_aatish 20w

    में

    शून्य सहस्र पदम नाभ हूँ मैं,
    मति हीन शक्ति हीन जीव मैं ही हूँ!
    मैं ही आदि हूँ अनंत भी मैं ही हूँ,
    सृस्टि की अविरल धारा का केवल एक अणु हूँ!

    पुरूषार्थ की ज्वाला कीर्ति पताका हूँ,
    शक्ति स्वरूपा नारीत्व भी मैं ही हूँ!
    दुरा चारी कपटी संवेदना हीन हूँ,
    मैं ही स्वेदानु की अविरल धार भी हूँ!

    रावण हूँ मैं पोंडरूक हूँ रक्त बीज हूँ,
    राम का आधार रावण का अंत हूँ!
    मैं महिषासुर हूँ चंड मुंड़ भी मैं हूँ,
    दुर्गा का त्रिशूल महिषासुर मर्दिनी मैं ही हूँ!

    मैं जन्म हूँ मृत्यु हूँ मैं महाकाल हूँ,
    प्रलय हूँ अंधकार हूँ मैं महाविनाश हूँ!
    सतयुग त्रेता द्वापर कलयुग हूँ,
    सृष्टि के विनाश का मैं कारण हूँ!

    नि:शब्द

    ©lafze_aatish