• vinaypandey84 6w

    जो दूसरों को दुख देकर खुद हस्ता है।
    तो होनी उसे दुख देकर सौ सौ बार रुलाती है।
    इसलिए दूसरो को दुख देने से पेहले इतना अवश्य सोच लेना चाहिए।
    यदि इसी दुख का वज्र अपने सिर पर गिरे तो क्या होगा।।
    भगवत गीता
    ©vinaypandey84