• ajit___ 6w

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    जब तुझे ले जाती हुई बाराती लारियाँ निकलेंगी,
    कुछ नहीं बस मेरे मुहँ से गालियाँ निकलेंगी!

    कई ग़मों के तहखाने खुल जाएंगे मेरे ही भीतर,
    मेरी जेब से उन तहखाने की चाबियां निकलेंगी!

    ग़ैर ख्यालों में भी मैंने तुझे कभी आने न दिया,
    किन हाथों से तेरे कानो की बालियां निकलेंगी!
    ©ajit___