• rudraaksha 64w

    इस क़दर हो इश्क़ कि
    शहर सहरा बन जाए
    मगर बेखबर रहे वों
    सब कुछ खाक होने तक ।

    @sanjeevshukla_@neha_netra@succhiii @rani_shri@rangkarmi_anuj

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    काश

    तेरे दर से जो गुज़रा ,
    कोई पत्ता उठा लिया मैंने
    आने वाले नुक्कड़ पे मुड़कर
    यूंही मुस्कुरा दिया मैंने ।।

    शोर है हवाओं में ,
    कि कोई सरफिरा हूं मैं ।
    काश तुम भी अखबार पढ़ती
    कि क्या कुछ लुटा दिया मैंने ।।
    ©rudraaksha