• prince_kmr 21w

    नहीं जानता प्राण किसने हँसाये
    नहीं जानता प्राण किसने रुलाये
    मगर मुसकराकर नयन अश्रु भर-भर
    लिखे गीत मैंने जगत को सुनाये,

    रहा दुख बिछुड़ जो गया अश्रु मेरा
    दुबारा अभी तक मुझे मिल न पाया,

    स्वयं बन सुमन शूल में मैं खिला हूँ
    स्वयं दीप बन आँधियों में जला हूँ
    न पतवार है हाथ में किन्तु फिर भी
    स्वयं नाव लेकर अकेला चला हूँ,

    बहा जा रहा आज मँझधार में मैं
    किनारा अभी तक मुझे मिल न पाया..।
    ©prince_kmr