• dipsisri 8w

    Totally rant.
    @writersnetwork U just liked my post so chupke chupke you're reading hindi hmm?^_^❤

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    बहुत कुछ कहना था तुमसे...

    तुम्हें पता है शामें मुझे इतनी क्यूं पसंद है?
    क्यूंकि उनमें मुझे तुम्हारी छवि दिखती है
    कितने खूबसूरत हो तुम,
    कितने साधारण होकर भी कितने विशेष हो तुम,
    कितने मासूम हो तुम,
    बस सब कुछ आंखों के सामने दिख जाता है इन शामों में!
    मुझे प्रकृति से अधिक प्रेम तब हुआ जब मुझे तुम मिले,
    जिन-जिन चीजों से तुम प्रेम करते थे
    उन सारी चीजों से,
    तुम्हारे प्रेम में ही मुझे खुद से भी प्रेम हुआ
    जिसके लिए मैं शुक्रगुजार हूं!
    जिस तरह तुम मुझे अपनी आंखों से देखते थे
    कुछ वैसे ही अब मैं शामों को देखती हूं,
    कुछ प्रश्न,अत्यंत प्रेम और सुकून के साथ।
    हम हृदय के साथ जन्म जरूर लेते हैं
    लेकिन उस हृदय पे एक फूल तब उगता है
    जब हम प्रेम में डूब रहे होते हैं।
    तुम ये अक्सर पूछते थे न कि मुझे कभी याद करोगी अगर मैं कभी चला जाऊंगा?
    मैं बस मुस्कुरा कर टाल देती थी मगर आज बताना चाहती हूं याद हम उसे करते है जिसे हम कभी भूल जाते हैं,
    तुम मेरे अस्तित्व से बंधे हो,
    हमारे चेतना के धागे इतने भी कच्चे नहीं है
    कि मैं तुम्हें कभी भूल पाऊंगी..
    कोई भी मुझसे पूछता है "कैसी हो"?
    मैं बिना कुछ सोचे कहती हूं एकदम अच्छी!
    मगर जब तुम पूछते थे तो न जाने क्यूं तुमसे सब कुछ झट से कह देती थी और तुम सच में मुझे छोटे बच्चे की तरह समझा कर शांत कराते थे,
    तुम्हारे सामने मुझे बचकानी हरकतें करने में कोई झिझक महसूस ही नहीं हुई,
    और एक तुम ही मेरे भीतर के बच्चे को संभाल पाते थे।
    वैसे अब वो बचपना मिट गया है तुम जो नहीं हो अब,
    पता नहीं कब मैं इतनी परिपक्व हो गई कि उदासी भी अब मुझसे उदास रहती हैं मेरे पास आने से डरती है।
    खैर छोड़ो ध्यान रखना अपना और गेम खेलकर दुबारा चोट मत लगा लेना खुदको मैं डांटने नहीं आउंगी और ना ही मनाने।


    ~तुम्हारी लेखिका