• kashtandon 14w

    Waves to Shore

    आज कई दिनों बाद में समंदर के पास बैठा हूं।
    उछलती लहरों को किनारे का सफर करते देख रहा हूं।

    वही कुछ दूर कई पत्थर लहरों की छेढ़कानी का आनंद ले रहे है।
    आज कई दिनों बाद उस चमकते सूरज को पानी के पीछे छुपता देख रहा हूं।

    कितनी मछलियां किनारे से पहले अपने घर को लौट जाती है
    कितने मछूवारो का जाल खाली लौट आता है।

    टहैलती हवा में आज एक अजब सा गुफ त गू सुना किनारे का लहरों से
    की तुम हर पल मेरे पास आते हो और मुझे देख कर वापस लौट जाते हो

    वही लहरों ने जवाब दिया
    हम तो कुदरत की बनाई नियमों से चलते है

    कभी किनारा कभी भाप बन के आसमा में उड़ते है
    कई बार रूप बदल के बादल जब बनते है
    तो कई खेतो में बारिश बनकर बरसते है।

    ये तो कुदरत का खेल है
    हमें बरसते ही कई नई किनारे मिल जाते है
    हम तो अपनी जिंदगी का एक सफर पूरा करने यहां आते है।

    किनारे ने मुस्कुरा कर कहा।
    मुझे खुशी है कि
    कई लहरों की मंजिल कुछ पुराने और नए किनारे है।
    हम भी ज़िंदगी का सफर पूरा तब कर पाते है
    जब लहरें हमें देख के वापस लौट जाते है।
    ©kashtandon