• sukritisingh 44w

    कुछ अलग

    इस बार जब हवाओं ने मुझे छुआ,
    तो साथ बस तेरी खुशबू थी, कोई खत नहीं
    लगता है जब तेरे होठों से गुजरी, तो तूने कुछ कहा ही नहीं।
    इस बार जब बूंदों ने मुझे भिगाया,
    तो साथ बस आंसू थे, कोई वजह नहीं
    लगता है जब बादल गर्जे, तो तूने रंजिश जताई ही नहीं।
    इस बार जब ओस की बूंदे को महसूस किया,
    तो साथ बस सर्द थी, कोई चाहत नहीं
    लगता है जब दिन ढला, तो तूने सिरहाने मेरा खयाल लगाया ही नहीं।
    सबा की तरह, है तेरा पास होना लाज़मी,
    हमेशा मेरा न सही, मुख्तसर है, कोई कमी नहीं।
    ख्वाबीदा ही सही, ये एहसास अलग था,
    तेरे जाम में नशा तो था, पर मुझसे ज्यादा मेरे जाने का था।
    ©sukritisingh