• thatunheardpoetess 24w

    उड़ जा

    उड़ जा,
    मत सोच, तू उड़ जा ।
    इस पिंजरे से निकल जा ।
    आज़ाद हो जा समाज की इन जंजीरों से।
    अपने इन ज़ख़्मी पंखों को जरा फडफड़ा।
    मत डर और इस उन्मुक्त गगन की उड़ान भर ।
    उड़ जा ,
    आकाश की इन सीमाओ को लांघ जा।
    उड़ जा,
    मत सोच, तू उड़ जा।
    ©thatunheardpoetess