• prashant_gazal 13w

    2122 2122 212

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    हे गुरू ! शत शत नमन है आपको l
    शिष्य का श्रद्धा-सुमन है आपको ll
    लेखनी परिवार का सौभाग्य है l
    'रिक्त' होने की कला वैराग्य है ll
    नित 'नवल' ऊर्जा जगाई आपने l
    'दीप्ति' दीपक बन जलाई आपने ll
    है 'परम' यह ज्ञान का भण्डार भी l
    व्याकरण की 'माधुरी' रसधार भी ll
    शिल्प , लय, रस, छंद की 'अनिता' यहाँ l
    'सौम्यता' 'रजनी' 'हिया' 'शुचिता' जहाँ ll
    काव्य का नीरद 'सरोजों' से भरा l
    तृप्त 'मानव' का 'विपिन' मन उर्वरा ll
    'शिवि', 'लवी', 'रानी', 'अतुल ', 'आनंद' में l
    शुभ 'विराजित' है 'किशोरी' छंद में ll
    शांतिप्रद 'सम्प्रति', 'तुषारापात' से l
    और 'आकांक्षा'मयी कुछ बात से ll
    शब्द 'गुंजित' हो चले 'संजय' सुनें l
    भाव की 'रेखा' सरल 'अंजलि' चुनें ll
    गीत सुंदर तो 'ग़ज़ल' कोई कहे l
    धार भावों की कहानी में बहे ll
    आप सबसे यह सुखद संसार है l
    आप सबसे लेखनी परिवार है ll

    आप सबसे लेखनी परिवार है ll
    ©prashant_gazal