• dipps_ 23w

    ग़ज़ल

    वादा सात जन्मों का दो पल भी निभाते नहीं,
    सच भी बोलते नहीं औ झूठ भी छिपाते नहीं!

    है मालूम सब मुझे, वो अदा उनके रूठने की,
    मसअला तो ये है फ़िर वो गले भी लगाते नहीं!

    रखते है नाराजगी भी किस बात कि ऐसी वो,
    अंधेरों से डरते है और दिये भी जलाते नहीं!

    पूछो कभी उनसे, जो रिश्ता इन दो दिलों का,
    मानते नहीं गैर भी औ अपना भी बताते नहीं!
    ©dipps_