• abhi_mishra_ 17w



    क्यों हमें औरों की तरह, पेश आना चाहिए,
    कभी रूठ जाना चाहिए, कभी मान जाना चाहिए।

    आख़िर क्यों कहें हम सिर्फ़ गज़लें प्रेम, उल्फत पर,
    हमें भी दुःख जताना चाहिए, गम सुनाना चाहिए।

    कोई ना सुनें तो एक रोज़, सिर्फ़ ख़ुद के लिए,
    कभी पढ़ना चाहिए शेर, कभी गीत गाना चाहिए।

    दिल में रख कर बात, ये रात कब बसर होगी,
    सुनना चाहिए उनकी, और कभी बताना चाहिए।

    आजकल की आशिक़ी में, चार दिन की चाँदनी में,
    दिल-ए-नादाँ को ना यूँ सताना चाहिए।

    ये दिखावे का दौर है, दिल की आँखें कमज़ोर हैं,
    इश्क़ हो या इबादत, खुल कर जताना चाहिए।

    ©abhi_mishra_