• theshekharshukla 16w

    मैं खरोंच खरोंच कर दिल से चिपकी हुई यादों को निकाल रहा हूँ, मेरे नाखून खून से लथपथ हो चुके हैं। मैं दरवाज़े पर बहते खून से लिख रहा हूँ कि अब इस दिल के साथ इससे जुड़े सारे एहसास भी मर चुके हैं। मैं अपने ज़िस्म में दिल की क़ब्र बनते देख रहा हूँ और ख़ामोशी से ख़ुद को फ़ना होते हुए भी। किसी से जुदा होने का फ़ैसला, जितना कठिन और नामुमकिन दिखता है अस्ल में वो ख़ुद की मौत को बुलावा देने के बराबर है।
    ©theshekharshukla