• ajaykrsingh123 20w

    शिक्षक दिवस

    ज्ञान अमृत का सागर घन कर,
    वो गागर हमको थमा दिया,
    राह दिखाई दीपक लौ बन कर,
    सम्पूर्ण तिमिर को मिटा दिया।

    कोटि नमन करबद्ध करें हम,
    गोविंद भले है जगत के पालक,
    चरण धरे फिर वही रहे हम,
    गुरू ही है वास्तविक संचालक।

    रीति नीति सब हमें सिखाया,
    मूल स्वरूप और रचना सिखलाई,
    नादान जब हमने हठ दिखाया,
    हमपर केवल करुणा ही बरसाई।

    धन बल बुद्धि सबकुछ दिया है,
    अलौकिक है ज्योति सूर्य समतुल्य,
    दीक्षा समय की ज्ञान निःशुल्क है,
    उनसे ही सीखा है सब जीवन मूल्य।
    ©ajaykrsingh123