• writersahab 51w

    कोई आया नहीं
    तुम्हारे जाने के बाद
    दरमियाँ ख्वाहिश रही
    दिल के बंद कमरे की
    बत्तियां बस अंधेरा करती रही
    खुली खिड़की से यादों की ठंडी हवा आती रही
    कोई मेहमान मानो आया भी
    मग़र सिर्फ जाने के लिये
    कोई बाद तक , कुछ शुरुआत तक
    मगर कोई टिका नहीं
    तुम्हारे जाने के बाद
    कुछ हल्की फ़ुल्की ख़ुशियाँ थीं तुमसे
    कुछ मेरे पल उधार थे तुमसे
    पर चलो , चलो छोरो , उधारी माफ़
    मग़र वफ़ा की बात हो गर तो कोसना नही
    कि कोई आया नहीं
    तुम्हारे जाने के बाद
    कोई आया भी अगर टिक पाया नहीं
    तुम्हारे जाने के बाद
    ©writersahab