• raaj_kalam_ka 17w

    #osr यह पंक्तियाँ हमारी प्यारी दोस्त कलम को समर्पित✍️
    जो हमारे विचारों को व्यक्त करते करते कब खास दोस्त बन जाती पता न चलता ����

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    सखी अलबेली

    चलती रहे कलम,कभी ना रुकना जाने
    चढ़ते सूरज से लढलती शाम तलक
    जीवन में बस रंग भरना जाने ।
    मुस्कुराए तू, तो मुस्कुराए ये कलम
    रोए तू, तो रोए ये कलम
    यह कलम नहीं सखी-सहेली है
    बड़ी ही निराली-अलबेली है ।



    सुन..इस सखी को पा,हमें ना भूल जाना
    जब भी कुछ लिखें,हमें ज़रूर बताना ।
    ©raaj_kalam_ka