• writersclub 124w

    वो जिसे अब मेरी आवाज सुनाई ही नहीं देती ,
    मैं क्या पता उसे आवाज लगाता बहुत हूं ,
    जिससे थोड़ी खुशी नसीब करनी थी मुझे ,
    अपने उस दिल को मैं बेवजह रुलाता बहुत हूं ,
    वह मुझे जिसने कभी समझा ही नहीं ,
    मैं उससे खामखा समझाता बहुत हूं ,
    मैं बाहर से शांत चाहे जितना लगूं ,
    अपने अंदर चीखता चिल्लाता बहुत हूं ।

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