• parle_g 13w

    बे-तदबीर - बिना किसी उपाय
    नखचीर - शिकार
    गिरफ्त-ए-शमशीर - तलवार की गिरफ्त में
    तक़बीर - दुआ करना
    हैदर - जो बहादुर होता है , शेर

    @vipin_ bahar @bal_ram_pandey @iamfirebird @prashant_gazal ��

    इक़ ग़ज़ल.... मामूली से ख़यालात ��

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    ग़ज़ल ( बैठा हूँ )

    वज़्न - 2212 2122 2221 222

    होकर के तन्हा कहीं पर बे-तद'बीर बैठा हूँ
    मैं किसका क़ातिल हूँ जो फिर पा' जंजीर बैठा हूँ

    तुम तो मुहब्बत के सहरा हो तुम-से कहें भी क्या
    मैं कम्बख्त हूँ जो यक प्यासा नखचीर बैठा हूँ

    मुझ'को मिरी मौत से कोई शिक'वा नही है दाग़
    मैं वैसे भी कब'से यक ज़ब्त-ए-तस्वीर बैठा हूँ

    वो आइनें फिर उसी शह'जादी के शहर निकले
    जिन आइनों में रजा, मैं दिल-गी'र बैठा हूँ

    अब बद्दुआ मत दो वाइज, मर'ने वाला हूँ मैं अब
    मैं अब तिरे दर में गिरफ्त-ए-शम'शीर बैठा हूँ

    कोई नज़र मुझ'पे भी रख दो की बावला हो जूं
    मैं कबसे कोई मुसीबत-ओ-तक़बीर बैठा हूँ

    सब कुछ मिरे हिस्से का खाते हो तुम मियाँ है'दर
    हैदर मैं हूँ की कोई फूटी तक़दीर बैठा हूँ
    ©parle_g