• radhika_1234569 15w

    निगाह जब से तेरी
    तलबगार हो गयी
    बचती है ज़माने से
    समझदार हो गयी l

    अटक के रह गया दिल
    किसी की निगाह में
    उफ़ निगाह उनकी
    दिल के पार हो गयी l

    कहता है ये दिल
    कू-ए- यार को चल
    दिल की बेतुकी-सी
    रफ़्तार हो गयी l

    रुकता है धड़कता है
    थम-थम के बहकता है
    ना जाने कैसे मन
    हाय गिरफ्तार हो गयी l

    देखो तो ये नसीब
    कितने है वो करीब
    वो सामने तो है यारब
    पर दीवार हो गयी l

    कहते है यूं तो वो भी
    तुम सा नहीं कोई
    हम मुन्तजिर है उनके
    राह हमवार हो गयी l

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    निगाह जब से तेरी
    तलबगार हो गयी
    बचती है ज़माने से
    समझदार हो गयी l







    ©radhika_1234569