• suhani05 26w

    तर्किल : रास्ता

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    मां

    तेरी यादों को लफ्जों में पिरोना मुश्किल है..
    तेरी यादों को लफ्जों में पिरोना मुश्किल है..
    तेरे बिना नजर ना आता अब कोई तर्किल है..।
    सुबह उठते जिसका चेहरा देखना चाहती हूं..
    तुम वो हो मां..
    पर तुम कहीं छुप गई हो आसमां में मां..
    छुप गई हो आसमां में मां..।

    जब देखती हूं किसी के सर पर एक मां का हाथ..
    तब याद आता है , तुम नहीं हो अब मेरे साथ..।
    यूं तो मैं किसी से कुछ कहती नहीं..
    पर एक रात भी तुझे याद कर रोती मैं सोती नहीं..।।
    तुझे याद कर रोती मैं सोती नहीं..।।

    जब भूखे पेट आंखें बंद हो जाती..
    जब किसी से कुछ कह ना पाती..
    मां तब बहुत याद आती है तेरी..।

    न जाने क्यों खुदा ने मेरी जिंदगी इतनी बिखेरी..
    मां बहुत याद आती है तेरी..।।
    मां बहुत याद आती है तेरी..।।
    ©suhani05