• renuka_07 84w

    थोड़ा थोड़ा करके

    थोड़ा थोड़ा करके
    तुम सेंध लगाते गए हो
    बदनीयती के पुतले
    तुम कितने गिरे हुए हो
    नक्कालों के फ़रिश्ते
    नकली तुम्हारी दुनिया
    इंसान की शक्ल में
    तुम कोई और चीज़ ही हो
    आती है तुमसे बदबू
    तुम शख़्सियत सड़े हुए हो
    क्या इंसानियत की बातें
    तुम इंसान ही नहीं हो
    सबकुछ तो खा चुके हो
    रह क्या गया है बाकी
    तेरे पापों की कीमत से
    जैसे संसार रो रहा हो
    तेरे अंत का तमाशा
    अब देखेगी दुनिया सारी
    तू चाँद नकली बना ले
    कर जाने की तैयारी
    तेरा निश्चित विनाश होगा
    तेरा नामोनिशां फ़ना हो
    ये भारत की ज़मीं है
    अब तेरे होश फाख्ता हों!!
    ©renuka_07