• ishq_allahabadi 8w

    मुन्तज़िर = इन्तज़ार करने वाला
    एवज़ = बदले में
    रन्ज ओ अलम आह ओ बुका = दुख दर्द में ज़ोर से रोना

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    चल दिया ।

    दर्द को रुसवाईयों का नाम देकर चल दिया,
    वो मुझे ख़त में अजब पैग़ाम देकर चल दिया।

    जिसकी न हो इन्तेहा बरसों रहूँ भी मुन्तज़िर,
    मुझको वो तन्हा ये कैसी शाम देकर चल दिया।

    बवफ़ाई के एवज़ रन्ज-ओ-अलम,आह-ओ-बुका,
    देखो वो क्या क्या मुझे इनाम देकर चल दिया।

    ढूँढती रहती हैं उसको हर जगह नज़रे मिरी,
    मेरी नज़रों को वो कैसा काम देकर चल दिया।

    उसकी यादों में बहाऊँ महफ़िल-ए-तन्हाई में,
    वो सितमगर आँसुओं का जाम देकर चल दिया ।
    ©ishq_allahabadi