• malay_28 125w

    ज़ुल्फ़ों में है घनी रात का बसेरा
    आँखों में जैसे साँस लेती ग़ज़ल !

    मासूमियत की एक ग़ज़ब रुबाई हो
    जैसे किसी झील में खिला कमल !

    आँखों की रूमानी एक ख़्वाब हो
    जैसे जादू से बना कोई हवा-महल !

    सुकून के कुछ नायाब हसीन पल हो
    आसमाँ से बरसता ख़ुदा का फ़ज़ल !

    घड़ी-दो-घड़ी पास तो बैठ जाओ मेरे
    थोड़ी देर ही सही दिल तो जाये बहल !

    ©malay_28