• avivek 19w

    Invisible feelings III

    ।।आज मेरी ही बातों से शर्मिंदा है कागज मेरे,
    इन्हे राज़ पता है इतने ,पर ये बोल नहीं सकते।।

    ।।लिखकर यूं बिक जाती है बड़ी बड़ी कई बातें,
    पर जो बात ज़ेहन में उतरी है, उसे तोल नहीं सकते।।
    ©avivek