• rangkarmi_anuj 7w

    तितली

    जब तुम एक दिन
    तितली बनकर उड़कर
    मेरे पास आओगी उस दिन
    से तुम्हारी थकान कम हो जाएगी,
    जब तुम एक दिन
    मेरे बगीचे में आओगी
    तब सारे गुलाब फिर से खिल जाएंगे।

    उड़कर आना जब
    तब तुम्हारे पसीने को पोछ
    दूँगा अपने हाथ से जो
    रुका होगा ओस बनकर माथे पे,
    कोशिश यह करना
    उसे हवा में उड़ने नही देना
    वरना मैं खाली हाथ
    रह जाऊँगा।

    मेरा कंधा
    तुम्हारे लिए है,
    उसपर सिर रख देना,
    कभी अपने पर रखकर सो जाना,
    मैं हल्के हाथों से सहला कर
    तुम्हारी थकान को
    गमले की मिट्टी में
    डाल दूँगा, और उसमें से
    अंकुरित होगा फूलों का
    गुलदस्ता जो तुम्हें मैं
    तुम्हारी नींद पूरी हो जाने के बाद दूँगा।

    जब तुम एक दिन
    तितली बनकर उड़कर
    मेरे पास आओगी उस दिन
    से तुम्हारी थकान कम हो जाएगी।
    ©अनुज शुक्ल "अक्स"
    ©rangkarmi_anuj