• prashant_gazal 20w

    इश्क़

    मैं अक़्सर सोचता हूँ, इश्क़ क्या है ?
    ख़ुदा है , बंदग़ी है, या ख़ता है ll

    तकल्लुफ़ से मुख़ातिब जो नहीं है,
    ज़माने से अलग दुनिया कहीं है l
    गुमाँ है इश्क़ या कोई हक़ीक़त,
    अधूरी या मुक़म्मल है मुहब्बत l
    कोई माँ-बाप को दिल में बसाए,
    कोई औलाद पे जाँ तक लुटाए l
    बहन का हाथ थामे ज़िंदगी भर,
    कलाई से बँधी राखी कहीं पर l
    सुख़न ने रूह को जैसे छुआ है,
    मैं अक़्सर सोचता हूँ, इश्क़ क्या है ?

    गया बचपन जवानी पास आई,
    फ़िजाओं की रवानी पास आई l
    नज़ारे देखते जब आह निकली ,
    उमड़ते बादलों के बीच बिजली l
    मुसलसल करवटों में शब गुज़ारे,
    सुहाने ख़्वाब, जिनमें चांद-तारे l
    सनम का दिल लुभाती आज़माइश ,
    मुहब्बत के लिए होती नुमाइश l
    निग़ाहें मिल रहीं , दिल खो गया है l
    मैं अक़्सर सोचता हूँ, इश्क़ क्या है ?

    अभी तक इश्क़ अच्छा लग रहा था,
    सुहाना और सच्चा लग रहा था l
    मगर अब दर्द क्यूँ होने लगा है ?
    मुहब्बत में मज़ा खोने लगा है l
    जुदाई अब सहन होती नहीं है,
    रहाइश एक पल की भी नहीं है l
    दुआओं में सनम की ख़्वाहिशें हैं ,
    मगर मजबूरियों की आतिशें हैं ll
    ख़याल-ए-हमसफ़र मुश्किल हुआ है ,
    मैं अक़्सर सोचता हूँ, इश्क़ क्या है ?

    वफ़ा-ए-यार पाकर मुस्कुराए ,
    हुआ ग़र बेवफ़ा आंसू बहाए l
    मिले या छोड़ जाए रास्ते में ,
    जुदा लम्हात दो, दोनों नशे‌ में l
    मुहब्बत की सही मंजिल कहाँ है ?
    ख़ुशी महबूब की पहले जहाँ है l
    बने ग़र हमसफ़र तो ज़िंदगानी ,
    जुदा हो जाए तो कोई कहानी l
    सनम बस ख़ुश रहे , इतनी दुआ है ,
    मैं अक़्सर सोचता हूँ, इश्क़ क्या है ?

    सुकून-ए-दिल मुहब्बत से अगर है,
    दिलों में हाय! नफरत क्यूँ मगर है ?
    बदलते वक़्त में बदले नहीं जो ,
    भले हो‌ ख़ाक पर पिघले नहीं जो l
    शमा से रोज़ परवाना जलेगा ,
    गुल-ए-उलफ़त तो रोज़ाना खिलेगा l
    वही रिश्ता बचेगा इश्क़ जिसमें ,
    ज़वानी में, बुढ़ापे , बचपने में l
    'मुहब्बत' को कहो, कैसा लिखा है ,
    मैं अक़्सर सोचता हूँ, इश्क़ क्या है ?

    ©prashant_gazal