• gunjit_jain 10w

    बोतल में रेत भरते बच्चे...

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    छोटे बच्चे,
    एक छोर से आधी दबी दबी सी
    प्लास्टिक की बोतल में,
    एक एक कण इकठ्ठा करके
    रेत भर रहे हैं।

    बढ़ते तापमान
    और तपती रेत में भी,
    न जाने उन्हें
    किस शीतलता ने ढक रखा है?
    शायद, गरीबी की शीतलता।
    वही शीतलता,
    जो हमेशा से उनके जीवन में
    खुशियों की बहार को,
    और मुस्कुराहट की बारिश को
    आने से रोक रही है।
    इस शीतलता ने
    मौसम के हर बदलाव को
    अपने भीतर कहीं थामे रखा है,
    जैसे रेत के कण बोतल में थम रहे हैं,
    आहिस्ते आहिस्ते,
    ठीक वैसे ही।

    मगर,
    क्या वो बच्चे
    वाकई रेत भर रहे हैं?

    धूप में रेत के चमकते
    उन बारीक कणों के ठीक पीछे,
    मुझे उनका बचपन
    साफ़ नज़र आ रहा है,
    मगर इन कणों से थोड़ा कम चमकता।
    जाने कहाँ गुम हो गयी उस बचपन की चमक!
    क्या उन छोटे घुँघराले बालों में कहीं?
    या सिकुड़े बदन पर लिपटे
    मैले कपड़ों पर लगी धूल में कहीं?
    या फ़िर,
    इन्हीं रेत के कणों में?
    शायद हां।

    प्लास्टिक की दबी बोतल में
    रेत नहीं, मगर रेत सा बिखरा,
    अपना बचपन भर रहे हैं
    आहिस्ते आहिस्ते,
    वो छोटे बच्चे।

    ©गुंजित जैन