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    जग-विजय

    जीतने से पहले धरा को
    मन के दानव को हरा लो
    फिर जीत कर विपत्तियों को
    चरणों की तुम धूल बना लो

    जितना चाहो जो जग को
    जीत लो पहले तुम मग को
    मन से बड़ा शत्रु नहीं है
    मन से बड़ा अस्त्र भी नहीं

    बंद कर के नयनों को
    खोल लो अन्तरचक्षु
    झाँक लो अपनी दरारें
    जान लो अपनी कमी को

    चलो एक कदम तो उठाओ
    रास्ता कठिन भले है
    एक बार तो शुरू करो
    चलो जरा, चलते ही जाओ

    बिन रुके जो तुम चले
    जीत निश्चित है तुम्हारी
    सारे कंटक, हर असफलता
    ईश्वर ने है दूर कर डाली

    अब कुछ भी नामुमकिन नहीं है
    मुट्ठी में क़िस्मत तेरी है
    हर साँस से हर आस तक
    अब सब तेरी है, सब तेरी है

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