• abhi_mishra_ 7w



    तेरे इश्क़ में मुसलसल, मुक़म्मल हो रहा हूँ,
    था कल, फ़िर मैं आज, फ़िर कल हो रहा हूँ।

    जो तुझ पर लिखी है, जो तुझ से बनी है,
    मैं तेरी कहानी, अमल हो रहा हूँ।

    ना जन्मों के वादे, ना सदियों के किस्से,
    इन्हीं चंद घड़ियों का पल हो रहा हूँ।

    जो माथे पर लिपटी है, बातों में दिखती है,
    अब हर उस शिकन का, मैं हल हो रहा हूँ।

    मोहब्बत में लाज़मी है, हुनर मात खाने का,
    मैं हर उस हुनर में सफ़ल हो रहा हूँ।

    ©abhi_mishra_