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    हमारे रिश्ते को जो बात खास बनाती है, वो ये की मुझे तुम्हें खो देने का डर नहीं है। तुमसे बिछड़ के कैसे रहूँगी ऐसी कोई कल्पना ही नहीं हुई। मैं तुममें अपना जन्नत नहीं ढूंढती। जन्नत तो भीतर होता है। तुम उस जन्नत का गुलाबी मौसम हो। भीतर जन्नत पैदा किये बगैर कोई मोहब्बत मुकम्मल नहीं हो सकती। हम मुक़म्मल हैं क्योंकि हमारी रूह जन्नती है। और हमारी मोहब्बत रूहानी। तुम्हारा नहीं होना सम्भव ही नहीं है। जैसे दोपहर को रात नहीं हो सकती। वैसे ही अलग हमारी ज़ात नहीं हो सकती। कुछ चीजें जोड़े में बनाई जाती हैं। जैसे मैं और तुम।
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