• nitinraj 23w

    जब सोने की चिड़िया ने अपना पंख फड़फड़ाया
    अंग्रेजी पिंजड़े टूट गए और आसमान में तिरंगा लहराया

    जब जुल्म बढ़ गए हद से ज्यादा, वीरों ने ऐसा जुनून दिखाया
    निचोड़कर अपने रगों से खून सीतमगर को लहू की नदी में डुबाया

    याद करो संघर्ष वो भगत सिंह और गांधी की
    मर के भी जो अमर रहा उस चंद्रशेखर के आजादी की

    गोरों के दिल दहलाने वाली
    आजादी की बिगुल बजाने वाली
    खून की प्यासी वो तलवार झांसी की रानी वाली

    गोडसे की टोली देशभक्त हो रहें हैं
    लगता है बाग -ए -चमन की खुशबू खो रहे हैं

    हमारी संकृति हमे जंजीर लगने लगे है
    गांधी जी बस दीवार पर टंगी तस्वीर बन के रह गए हैं

    देकर दान में सांसें किसी ने पाई आजादी
    खेल रहा है खेल सियासत धर्म धर्म और जाति जाति

    बेच कर भविष्य युवा की पेट भर रहे व्यापारी की
    समझ रहे हैं बखूबी तुम्हारी अगली चाल है किसानी

    कभी सोचा है हमने कब सिख लिया किसी को दुश्मन की नजरों से देखना
    हमने तो वसुधैव कुटुंबकम् सीखा था

    हमने कब सीखा ये बेटा और बेटियों का फर्क हमने तो स्त्रियों के लिए रामायण और महाभारत देखा था

    कब सीखा ये धर्म और जातियों का फर्क
    हमने तो विभिन्नता में एकता देखा था

    आजादी की हार्दिक शुभकामनाएं
    ©nitinraj