• darpan 27w

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    ग़ज़ल..

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    मुमकिन है सहरा निकले जो दर से दरिया दिखता है..
    अंदर जाकर देखो ना बाहर से तो क्या दिखता है

    आंखों पर पट्टी बाँधी है वो भी ऐसे बाँधी है,
    सबको लगता है अँधा हूँ जबके पूरा दिखता है

    मुझको अपने पास बिठाकर मेरी मुश्किल समझो यार,
    दूर खड़े होकर मत सोचो- "पागल लड़का दिखता है"

    जब इससे कुछ ज़्यादा देखो, तब हमको आवाज़ लगाना,
    इतना तो हम देख चुके हैं तुमको जितना दिखता है

    इक लड़की से मैंने पूछा, बता बता कैसा दिखता हूँ?
    सौ सौ नुक्स निकाले और फिर बोली अच्छा दिखता है

    जैसे देख रहे थे अब तक वैसे नइ.. ऐसे देखो,
    देखा!!.. बोला था ना मैंने ऐसे ज़्यादा दिखता है..

    इस रस्ते पे आगे तुम इक ऐसा दरिया देखोगे,
    जिस दरिया में डूबो तो आगे का रस्ता दिखता है

    'दर्पन' के चेहरे की रौनक कुछ फ़ीकी फ़ीकी सी है,
    सबको अपने दिल में बसाने वाला तन्हा दिखता है


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    दर्पन❤️