• the_nerd_girl 35w

    तुम, मैं और यह शाम, गुनगुनाती, चंचल;
    हवा संग डोलती, कभी बेचैन, कभी स्थिर,
    रात की दहलीज पर जुगनू सी चमकती हैं
    तुम, मैं और यह शाम, एक सी ही लगती हैं।

    -Prarthana
    ©the_nerd_girl