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    दिल में दर्द होता हैं
    चेहरे पे मुस्कान रखता हूँ
    मैं शायर हूँ साहब
    हर महफ़िल में अपने एहसास रखता हूँ
    लफ़्ज़ों में चीखें होती हैं
    आवाज़ में मिठास रखता हूँ
    मैं शायर हूँ साहब
    अपने लफ़्ज़ों से अपनी शख्सियत का आगाज़ करता हूँ
    हाथों में कलम होती हैं
    कागज़ों पर ख़्वाब बुनता हूँ
    मैं शायर हूँ साहब
    बहते अश्कों का समुंदर लिए चलता हूँ
    ज़िन्दगी मौत से बत्तर होती हैं
    अनगिनत मुस्कुराहट लिए बहता हूँ
    मैं शायर हूँ साहब
    हर ज़ख्म को रूह से लगाये जीता हूँ
    ©i_am_an_unprofessional_writer