• jazz_baaatt 33w

    ख़्वाब तो मर गया मगर
    लहू के छींटे अब भी हैं दामन पे मेरे

    अरमाँ तो जल गया भले
    राख के दाग़ मिटते ही नहीं

    ख़्वाहिशों ने जिस्म छोड़ दिया
    रुहों के खंडहर संभाले हूँ मैं

    ©jazz_baaatt