• sourabh_sharma 84w

    सजा !!

    सोचा था , जल्द गुजर जायेगा ,
    क्या पता था, इतना तड़पाएगा ,
    वो पिछली मुलाक़ात ,
    क्या ,, आखरी मुलाक़ात बन जायेगा ?!

    दूर तो थे ही हम ,
    मिलने की उम्मीद थी ,
    सुकून तो था दिल में ,
    पर तू ,नज़रो से बड़ी दूर थी !!

    निगाहें ,उन नज़रों को ढूंढ रही थी ,
    खुद से खुद का पता पूछ रही थी ,
    तस्वीरों से अब मन भर रहा था ,
    गले लगने को दिल तरस रहा था !!!

    गलियां ,परछाई भूल रही थी ,
    रास्ते सड़कें सब बंद पड़े थे ,
    क़ैदी बन अपने घर में हम,
    सजा की आखरी तारिक, पूछ रहे थे !!!!
    ©sourabh_sharma