• bal_ram_pandey 24w

    जीवन-चलचित्र

    चलचित्र सा जीवन दिख रहा
    किरदार कितने आए और गए
    स्मृति पटल पर रहा शेष दृश्य
    बंधन तोड़ पखेरू कितने गए

    जलते पतंगे दीप में देहरी पर
    और आईने में कैद है उदासी
    गगन में उड़ता पंछी थका हारा
    उतर रहा आंगन में लेते उबासी

    सूख गया है मन का कुआं
    उम्र के पत्ते पीपल सम झर गए
    विरह पंछी दूर बैठा डाली पर
    बहती पछुआ हवा मन हर गए

    दिन ढलता है पल पल हर दिन
    सृजन का ओढ़कर नित आवरण
    शूल रहते डालियों पर अक्षय
    फूल झरते महकाते वातावरण

    पारस -स्पर्श सी अनगिनत यादें
    हृदय- लोह- कांचन कर जाती हैं
    आगमन तुम्हारा पाहुन सावन सा
    सूखे अधरों को पावन कर जाती हैं

    ©bal_ram_pandey