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    " उसके बिना मेरे ख्वाब "

    उसके बिना मेरे ख्वाब
    जैसे बिन बदली के बरसात
    जैसे तारों की है छाँव मगर
    है जुगनूओं की तलाश।

    उसके बिना मेरे ख्वाब
    जैसे नदी का है उल्टा बहाव
    जैसे मछलियों को नहीं है
    पानी से बेइंतहा प्यार।

    उसके बिना मेरे ख्वाब
    जैसे नशे की हो दिल पर मार
    जैसे मयखाना तो है पर
    नहीं है उसमें शराब।

    उसके बिना मेरे ख्वाब
    जैसे तपती जमीं को पानी की प्यास
    जैसे मृगतृष्णा में लिपटी हुई
    ना पूरी होने वाली कोई आस।

    उसके बिना मेरे ख्वाब
    जैसे इक नज़र का है इंतज़ार
    जैसे मोहब्बत तो है पर
    नहीं है दिल को करार।

    उसके बिना मेरे ख्वाब
    जैसे घरौंदे के बिन भटकाव
    जैसे घौंसला तो है
    पर नहीं है डाल।

    उसके बिना मेरे ख्वाब
    जैसे नींद में भी नींद की तलाश
    जैसे आँख है बंँद और
    नीँदों से अनगिनत सवाल।

    दिल के एहसास। रेखा खन्ना
    ©dil_k_ahsaas